विविधता से समावेश तक
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विविधता से समावेशन एक महत्वपूर्ण संवैधानिक व सामाजिक मुद्दा है। यह शब्द प्रांतिकताओं, जातियों, धर्मों, भाषाओं, आदि की भिन्नता की और अंकित करता है। विविधता का समावेशन अर्थात समाज के हर वर्ग, जाति, लिंग, धर्म, और विचारधारा की विशेषता को प्रतिष्ठित रूप से सम्मिलित करने की प्रक्रिया है। यह समाज की समृद्धि, समानता और समरसता को प्रोत्साहित करते हुए विकास के पथ की ओर अग्रसर करता है। इसके द्वारा समृद्धि और आत्मनिर्भरता के श्रोत संरक्षित होते हैं जो किसी भी समाज की दृढता के आवश्यक मापदंड है। समावेशन का महत्व शिक्षा, रोजगार, राजनीति और समाज के अन्य क्षेत्रों में समरसता और समानता के विषय में जागरूकता और संवैधानिक व्यवस्था को बनाना है। इसके अभाव में, समाज में असमानता व्याप्त होकर विघटन होने लगता है, जो आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है जबकि समावेशन विभिन्नताओं की समझ उत्पन्न कर उनको स्वीकृत करके आपसी सहयोग समरसता, साझेदारी और सामंजस्य की भावना स्थापित करने में सक्षम होता है। समावेशन के लिए सकारात्मक कदम उठाने में समूह, सरकार, और समाज मुख्य अभिकरण हैं। विभिन्न सामाजिक संस्थाएँ इसको धरातल पर लाने में सहयोगी भूमिका का निर्वाह करती हैं। इसलिए, एक समावेशी समाज स्थापित करने का अर्थ है कि एक समाज में विभिन्न स्तरों पर मौजूद विभिन्न संस्कृतियों के मूल्यों को शामिल करना और जाति, लिंग, धर्म, नस्ल, दिव्यांगता, भाषा, सामाजिक-आर्थिक स्थिति के अंतर के बावजूद सभी समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। विविधतापूर्ण समाज में समावेशन को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षा एक सशक्त साधन है। समावेशी शिक्षा प्रत्येक बच्चे को सीखने की एक निष्पक्ष और सामान्य प्रणाली में स्थापित करती है जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। समावेशन, विविधता को समाज की मूलभूत विशेषता के रूप में स्वीकार करता है। उपयुक्त समावेशन एक विविध समाज की समृद्धि का वाहक है जहाँ प्रत्येक समूह को उसकी विशेषताओं को स्वीकार करते हुए मुख्यधारा में लाना वास्तव में संभव बना सकता है इसलिए एक बहुसांस्कृतिक सामाजिक प्रणाली में ही समावेशन के लक्ष्यों को सर्वोत्तम रूप से प्राप्त किया जा सकता है। प्रस्तुत पुस्तक, विविधता से समावेशन तक के माध्यम से समाज में व्याप्त विविधता के विभिन्न पक्षों पर विचार करने के साथ ही उनको किस प्रकार से समाज में समायोजित कर आगे की राह प्रशस्त की जाए इस पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। आशा करते हैं कि प्रस्तुत पुस्तक विविधता से समावेशन तक इस विषय को विभिन्न परिप्रेक्ष्यों में समझने में उपयोगी सिद्ध होगी। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 15 चयनित आलेखों का संकलन किया गया है।
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